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बोले किसान खाद पानी का समय और आन्दोलन में अन्नदाता सरकार बिता रही समय

किसानों की हो रही है मौतें
मौसम भी बन रहा है कारण
दिल्ली; किसान आन्दोलन में किसानों और सरकार के बीच हुई बातचीत में कोई हल नहीं निकल सका; वार्ता के बाद किसान नेताओं का कहना था कि सरकार समय बिता रही है; जबकि आन्दोलन कर रहे किसानों के लिए मौसम भी मौत का कारण बन रहा है; अब तक करीब 60 किसानों की मौत हो चुकी है; किसान भी अब आगे की रणनीति बनाने में जुट गए है;दूसरी तरपफ यह समय रबी की पफसल के लिए खाद पानी का है, और किसान आन्दोलन में है, ऐसे में रबी की पफसलें भी प्रभावित हो सकती है;
गौरतलब है कि सरकार अब तक जिसे पचास प्रतिशत सहमति बता रही है, उसकी असली परीक्षा तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने व न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी देने के मुद्दों पर कोई निर्णय है। अभी सरकार न ताे न्यूनतम समर्थन मूल्य का कानून बनाने को राजी दिखाई दे रही है, न उक्त कृषि कानूनों को वापस लेने को ही, जबकि किसानों का कहना है कि वे उन्हें वापस लेने के तरीकों पर ही बात करेंगे और महज कुछ संशोधनों के सरकार के प्रस्ताव को मानकर अपना आन्दोलन खत्म नहीं करेंगे। ऐसे में किसान आन्दोलन लंबा चल सकता है; किसान नेताओं का कहना है कि समय बीत रहा है किसानों की समस्या का हल नहीं निकल रहा है; किसान और सरकार के बीच अब वार्ता 8 जनवरी को होगी;
मौसम ने डाला मुश्किल में
किसानों को आन्दोलन करते हुए करीब 40 दिन से अधिक का समय हो गया है; किसान अपनी मांगो को माने बिना घर वापसी को तैयार नहीं है; दूसरी तरपफ मौसम किसानों को मुश्किल में डाले हुए है; तापमान में उतार चढाव जारी है, मावठा भी गिर चुका है, ऐसी विषम हालातों में भी किसान डटे हुए है; इससे किसानों के स्वास्थ्य पर तो विपरीत प्रभाव हो रहा है; इसके साथ ही उनकी मौतें भी हो रही है; अब तक जिन किसानों की मौतें हुई हैं; उनमें ठंड लगने के कारण भी सामने आए हैं; यदि किसान आन्दोलन आगे चलता है तो और किसानों की जानें जा सकती है;
खादपानी का समय
जनवरी का महीना रबी की पफसल के लिए रबी की पफसल और किसानों के लिए महत्वपूर्ण रहता है; इस समय गेहूं, सरसों, चने की फसल के खाद और पानी का समय है, रबी की पफसल खेतों में खडी हुई है; और किसान अपनी मांगों को लेकर आन्दोलन में है, किसानों का ही कहना है कि हरियाणा और पंजाब से किसान आन्दोलन में अधिकांश किसान परिवारों से किसान बार्डर पर बैठे हुए है, ऐसे में रबी की फसल की देखरेख करने वाले भी घरों पर नहीं बचे है, इससे पफसल को समय पर खाद और पानी नहीं मिल पा रहा है; ऐसे में इस बार रबी की फसल का उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है;
किसानों को होगा आर्थिक नुकसान
यदि जनवरी के महीने और किसान आन्दोलन जारी रहता है तो जिन राज्यों में किसान आन्दोलन का असर ज्यादा है, ऐसे राज्यों में रबी की पफसल प्रभावित हो सकती है; गेहूं के उत्पादन पर असर पडा तो किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड सकता है; पंजाब और हरियाणा देश के लिए अन्न उपजाने में सबसे आगे है, यदि इन दोनों राज्यों में रबी की पफसल का उत्पादन प्रभावित हुआ तो इसका असर पूरे देश पर देखा जा सकता है; ऐसे में जैसे जैसे यह किसान आन्दोलन आगे बढ रहा है, मुश्किलें बढाएगा;

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