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वैशाखी विशेष : घर में रहकर भी बैशाखी की धूम कम न हो

 

 

 

[mkd_highlight background_color=”” color=”red”]मनीषा शाह[/mkd_highlight]

 

 

 

13 अप्रैल अवसर है वैशाखी पर्व का भारत एक उत्सव प्रिय देश है हर भारतवासी बड़े धूमधाम से जोशो खरोश से उत्सव मनाता भी है, चाहे वह जिस भी संस्कृति का हो,इस वर्ष जैसा कि हम जानते हैं कोरोना नामक महामारी ने पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया है, इससे भारत भी अछूता नहीं है.. इस वजह से भारत वासियों ने उत्सव को बाहरी रूप ना देकर आंतरिक रूप से मनाने का निर्णय लेकर अपने अनुशासित होने का बेहतरीन परिचय दिया है। लॉकडाउन के दौरान चाहे रामनवमीं,नवरात्रि ,गुड फ्राइडे, हनुमान जयंती,महावीर जयंती या शबे बरात हो हमने घर में रहकर मानाए है , इसी तरह अब आज वैशाखी को मनाएंगे।

वैशाखी वस्तुतः ईश्वर को धन्यवाद करने के लिए मनाई जाती है,नई रबी फसल आने की खुशी में..। आइए चलें इस बार एक नई सोच रूपी फसल के साथ वैशाखी मनाई जाए.. और कुछ गिद्दा और भांगड़ा घर में ही कर लिया जाए इन गीतों के संग..

” बारी बरसी खटन गया सी खट के लेआंधी हिम्मत की हिम्मत का सजदी जब करोना भागे ओंधे पैर “
दूसरा प्रसिद्ध गीत “अलिफ अल्लाह चंबे दी बूटी ते मेरे मुर्शिद मन विच लाई हूं पीर मेरेया जुगनी जी”

वास्तव में वैशाखी का मूल जज्बा इन दोनों गीतों से छलक कर आता है.. जब सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर शहादत को प्राप्त हुए.. तब उनके पुत्र जो दसवें गुरु गोविंद सिंह जी हुए ..जिन्होंने बताया कि जो हिम्मत साहस भाईचारे का बीज उनके पिता उनके अंदर बो गए थे.. उन्होंने इस चेतना को खालसा नामक पंथ या विचारधारा से लोगों में संचार किया… खालसा उस वक्त ऐसी मशाल बनकर आई …जब भारत गुलामी के दौर से गुजर रहा था… ऐसे में खालसा ने हर तबके से प्रेम और सद्भाव हर भेदभाव से विरक्त होकर ..केवल ईश्वरीय सत्ता को मानने का उपदेश दिया… एवं साहस के साथ जीवन जीने का संदेश दिया.. गुरु गोविंद सिंह द्वारा खालसा प्रथा प्रारंभ करते समय पांच व्यक्तियों जो अलग-अलग तबके के थे.. जिन्हें पंच प्यारे भी कहा गया.. उन्हें केसरगढ़ साहिब में दीक्षा दी… और फिर आगे भी यह प्रथा सुचारू रूप से जारी है ..और इस प्रकार गुरु गोविंद सिंह ने इस परंपरा का आरंभ करते हुए सिखों के आखरी दसवें गुरु कहलाए ..और उसके बाद उन्होंने ग्रंथ साहिब को ही मार्गदर्शक मानने को कहा..

सिख समाज द्वारा बिना किसी जात पात धर्म के भेदभाव के देश में हर जगह लंगर लगाकर जरूरतमंदों को भोजन कराया जा रहा है । इसी प्रकार हम भी इस बार वैशाखी की मूलभूत भावना..सेवा.. साहस और हिम्मत के साथ इस महामारी से लड़नें में एक दूसरे का साथ दें।

 

आप सभी को वैशाखी पर शुभकामनाएं एवं बधाई

 

 

                                                                                                                       (  लेखिका एमटेक डिग्री प्राप्त इंजीनियर है   )

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