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मजदूर माता-पिता ने किया संघर्ष, अब देश सेवा करेगा बेटा

बीएसएफ कैंपस में शुक्रवार सुबह नवआरक्षकों का शपथ ग्रहण समारोह हुआ। पहली बार नवआरक्षकों को बीएसएफ ने 11 महीने तक ट्रेनिंग दी। ये जवान अब चंबल और ग्वालियर में सेवा देंगे। यहां तक पहुंचने के लिए उनकेपरिवारों ने भी संघर्ष किया। माता-पिता ने कर्ज लेकर बेटे का खाकी पाने का सपना साकार किया।

स्पेशल आर्म्ड फोर्स (एसएएफ) के इन 393 नवआरक्षकों को बीएसएफ के अफसर 11 माह से ट्रेनिंग दे रहे थे और शुक्रवार को आखिरी दिन था। डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला सहित अन्य अफसरों ने उन्हें देश सेवा की शपथ दिलाई। शपथ समारोह में बीएसएफ के कमांडेंट अनंत सिंह, सहायक प्रशिक्षण केंद्र के महानिरीक्षक बीके मेहता सहित कई पुलिस अफसर थे। नवआरक्षकों ने मैदान में ट्रेनिंग का नमूना पेश किया। जहां उन्होंने परेड से अनुशासन, गन शूटिंग से आतंकवाद और नक्सलवाद से निपटने के जौहर दिखाए।

डीजीपी ने बताया पुलिस हर परिस्थिति से निपटने में माहिर हो, इसे देखते हुए बीएसएफ अफसरों के सामने नवआरक्षकों को ट्रेनिंग देने का प्रस्ताव रखा था। इस पर बीएसएफ ने उन्हें फिजिकल फिटनेस, गन शूटिंग, देश सेवा, राष्ट्रीय एकता व अखंडता का प्रशिक्षण दिया। नवआरक्षक ट्रेनिंग के बाद फील्ड में उतरेंगे तो उसे ड्यूटी न मानते हुए सेवा मानेंगे। उन्होंने कहा खाकी ईश्वर का उपहार है। इससे राष्ट्र, समाज व परिवार की सेवा कर सकते हैं। पुलिस का काम जटिल है। इसमें संयम व अनुशासन रखना होगा। टीम भावना की तरह काम करना होगा। गांव, शहर, बटालियन और प्रदेशों में खुद को न बांटें। उससे आपसी बल कम होता है। हम भारतीय हैं, इस सोच से काम करना।

बीएसएफ का फंडा : फिजिकल फिट और गोली हिट

नवआरक्षकों ने बताया यह ट्रेनिंग जिंदगीभर उनके काम आएगी। यहां के आधुनिक हथियारों से शूटिंग सीखी जो ड्यूटी में हमारे लिए कारगर रहेगी। बीएसएफ का एक फंडा है ‘फिजिकल फिट और गोली हिट’ जो हमेशा याद रहेगा। मुरैना के भूपेंद्रसिंह तोमर, वीरेंद्र धाकड़ व फिरोजाबाद (यूपी) के नीरज कुमार को इंडोरेंस में पदक मिला।

मजदूर माता-पिता ने गहने गिरवी रख बेटे को पढ़ाया

मुरैना निवासी रिंकू रजक (नवआरक्षक) ने बीएससी कम्प्यूटर साइंस से ग्रेजुएशन किया। पिता गेंदालाल व मां भगवती मजदूरी करते थे। बड़े भाई शिव सिंह आर्मी में और पंजाब में सेवा दे रहे हैं। दीक्षांत समारोह में रिंकू के माता-पिता आए थे। उन्होंने बेटे को खाकी वर्दी में सजे देखा तो खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने बताया कि कर्ज लिया, गहने गिरवी रखे और बेटों को पढ़ाया। आज वह सफल है, इससे बड़ी खुशी हमारे लिए कुछ नहीं।

भाई ने कान पकड़कर देश सेवा में लगाया

रीवा के कस्तरी गांव में रहने वाले अनूप सिंह ट्रेनिंग लेने के बाद ग्वालियर रेंज में सेवा देंगे। अनूप के भाई भुज (गुजरात) स्थित पवन चक्की बनाने की कंपनी में इंजीनियर हैं। छोटे भाई की कामयाबी पर उन्हें सबसे ज्यादा खुशी हुई। बीए तक पढ़े अनूप ने बताया कि काम कुछ नहीं था। गलियों में मारपीट करता रहता था। भैया ने एक दिन कान पकड़ा और झगड़े और विवादों में रहने के लिए पुलिस की तैयारी करने को कहा। उसके बाद इसे लक्ष्य बना लिया। अब लड़ूंगा, लेकिन समाज और देश के लिए।

पत्नी ने दिया साथ

भिंड के अवधेशकुमार गुर्जर ने बीए की पढ़ाई की। पुलिस की परीक्षा दी और सिलेक्शन हो गया। उनके पिता किसान हैं। उन्होंने कहा मार्च 2017 में शादी हुई। देश सेवा करना चाहता था। पत्नी ने भी साथ दिया। इसी तरह वीरप्रताप चौहान चंबल रेंज में सेवा देंगे। उनकी अक्टूबर, 2017 में सगाई हुई। उन्होंने ठाना कि पुलिस बनने के बाद ही शादी करेंगे।

80 प्रतिशत नवआरक्षक पढ़ाई में रहे अव्वल

मथुरा के तेजपाल सिंह परेड कमांडर थे। वे बीएससी, बीएड, पीजीडीसीए कर चुके हैं। इसी तरह, अलीगढ़ (यूपी) के भुवनेशकुमार शर्मा बीसीए, भिंड के मनीष सिंह यादव ने बीएससी कम्प्यूटर साइंस व आगरा के अंकित सिंह बीएससी मैथ्स सहित करीब 80 प्रतिशत नवआरक्षकों ने बेहतर पढ़ाई की है।

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