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चलती ट्रेन में चोरी होने पर बोगी में ही मिलेगी FIR की कॉपी

ट्रेनों में अपराधियों की सक्रियता को देखते हुए रेल सुरक्षा बल ने पीड़ित यात्रियों को चलती ट्रेन में ही एफआईआर कराने की सुविधा और उसकी कॉपी देने का फैसला किया है। कागजी कार्रवाई पूरी कर तुरंत सुरक्षा बल छानबीन में जुटेगा, जिससे फरियादियों को राहत मिलेगी। रायपुर मंडल में नए सुरक्षा आयुक्त अनुराग मीणा ने प्रभार संभालते ही यह नई व्यवस्था बनाने फैसला किया।

उन्होंने जीआरपी के साथ तालमेल बनाकर ट्रेनों में सुरक्षा के बेहतर इंतजाम करने जोर दिया। डब्ल्यूआरएस कॉलोनी स्थित महानदी भवन में आयोजति प्रेसवार्ता में आयुक्त ने सुरक्षा बल की वार्षिक कार्रवाई की रिपोर्ट पेश की। उन्होंने सालभर में रिकॉर्ड कार्रवाई की जानकारी दी।

बोगी में काटी जाएंगी तीन पर्चियां

पीड़ित यात्री की शिकायत होने पर बोगी में तुरंत एफआईआर दर्ज होगी। इसके लिए तीन पर्चियां काटी जाएंगी। एक पर्ची पीड़ित को मिलेगी, दो पर्चियां रेल सुरक्षा बल व जीआरपी को लिए होंगी।

बढ़ाएंगे सुरक्षा बल, आसान होगा काम

आयुक्त ने कहा कि ट्रेनों में भीड़ को देखते हुए सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाई जाएगी। प्रत्येक ट्रेन में 6 से 7 का सुरक्षा बल मौजूद होगा, जो शिकायत होते ही तुरंत कार्रवाई करेगा।

डायल 112 में मर्ज का ऑप्शन हो सकता है बेहतर

रेल सुरक्षा बल के द्वारा जारी हेल्प लाइन नंबर 182 को डायल 112 में मर्ज किया जा सकता है। अपराध संबंधी शिकायत व सुझाव के लिए जारी रेलवे के इस हेल्प लाइन नंबर पर इस साल केवल 215 शिकायतें ही दर्ज कराई गई हैं। इस नंबर का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोग ले सकें, इसके लिए राज्य सरकार से भी पहल की जा सकती है। इमरजेंसी सेवा के लिए डायल 112 शुरू करने का प्रस्ताव है। इसमें राज्यभर के सभी हेल्प लाइन नंबर मर्ज होंगे। रेलवे चाहे तो 182 को भी शामिल कर सकता है। कई बार घटना होते ही हड़बड़ाहट में पीड़ित 100 नंबर दबा देते हैं। नंबर मर्ज होने से यह परेशानी नहीं होगी।

महिला बोगी में बैठने वाले पुरुष हिट लिस्ट में

पिछले साल रेल सुरक्षा बलों की कार्रवाई में सबसे ज्यादा महिला बोगी में बैठने वाले पुरुषों पर गाज गिरी है। सुरक्षा बल ने 2488 व्यक्तिों को पकड़ा और रेलवे अधिनियम 162 के तहत कार्रवाई की। ट्रेनों व रेलवे स्टेशन में गंदगी फैलाने वाले 2539 व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ लोगों को परेशान करने के मामले में 387 किन्नरों के खिलाफ जुर्म दर्ज किया गया। रेलवे अधिनियम के तहत अन्य मामलों में भी कार्रवाई हुई है। असामाजिक तत्वों के मामले में साढ़े नौ हजार लोगों के खिलाफ प्रकरण बनाए गए हैं।

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