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शीतलहर की चपेट में प्रदेश, पाले का मंडराया संकट

– तापमान में हो रही लगातार गिरावट
मध्यप्रदेश। प्रदेश में इस समय शीतलहर का प्रकोप जारी हैय तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। तापमान और शीतलहर के कारण से रबी की पफसलों पर पाले का संकट मंडराने लगा है। मौसम विशेषज्ञों ने किसानों को पाले से फसलों को बचाने के संबंध में सलाह दी है। उन्होंने बताया कि जिले में सर्दी का असर बढ़ना शुरू हो गया है। संभावना है कि शीतलहर और पाले का प्रकोप फसलों को प्रभावित कर सकता है। जब आसमान साफ हो हवा न चले और तापमान कम हो जाए तब पाला पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। दिन के समय सूर्य की गर्मी से पृथ्वी गर्म हो जाती है तथा पृथ्वी से यह गर्मी विकिरण द्वारा वातावरण में स्थानांतरित हो जाती है। फलस्वरूप रात्रि में जमीन का तापमान गिर जाता है, क्योंकि पृथ्वी को गर्मी नहीं मिलती है। तापमान कई बार 0 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच जाता है। ऐसी अवस्था में ओस की बूंदे जम जाती है। इस अवस्था को पाला कहते हैं।
पाले से कैसे बचाव करें
फसल पर पाले की आंशका को ध्यान में रखते हुए घुलनशील सल्फर 1ण्5 किग्राण् या पोटेशियम सल्फेट किलोग्राम एवं घुलनशील बोरॉन 500 ग्राम 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। जो पौधों की कोशिकाओं में एकत्रित जल को जमने से बचाता है। पाले की आशंका को देखते हुए यह सुझाव दिया जाता है कि किसान भाई खेत में हल्की सिंचाई करें। जिससे फसल के आसपास गर्म वातावरण निर्मित होने से तापमान नहीं गिरता है, जिससे फसलों को बचाया जा सकता है। सिंचाई फव्वारा विधि द्वारा करने की स्थिति में यह ध्यान रखें कि स्प्रिंक्लर लगातार प्रातःकाल से सूर्योदय तक चलायें जिससे फसलों को बचाया जा सकता है। यदि फव्वारा सुबह के 4 बजे तक चलाकर बंद कर दिया जाता है तो ऐसी स्थिति में फसलों की पत्तियों पर उपस्थित जल जमकर नुकसान पहुंचाता है। इस बात का ध्यान रखें कि कभी भी फव्वारा सूर्योदय के पहले बंद न करें। खेतों के आसपास मेढ़ों पर घास फूस एकत्रित कर धुआं करें जिससे फसल के चारों तरफ तापमान गिरने से बचाया जाकर फसलों को सुरक्षित किया जा सकता है। खेत की मेढ़ पर पेड़ व झाडियों की बाड़ लगाएं पाले से बचाव के लिए कम से कम खेत की उत्तर पश्चिम दिशा में मेढ़ पर झाडि़यों की बाड़ लगाये। इससे शीतलहर द्वारा होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।

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