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जब नन्‍ही आदिवासी बालिका ने सीएम को पहनाया गमछा तो गोद में लेकर किया स्‍नेह

रायपुर। आदिवासियों के विकास के लिए देशभर से जनजातीय संस्कृति संगम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दीप प्रज्‍ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। बघेल ने जुटे जनजाति साहित्य पर लिखने वाले विद्वानों, साहित्यकारों व आदिवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि पहले लोग नक्सली डर से छत्तीसगढ़ आने से डरते थे लेकिन यह डर अब खत्म हो गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहाए विलुप्त हो रही संस्कृति, भाषा, लोक नृत्य को बचाना हमारा उद्देश्य है। कहा, आदिवासी को मुख्य धारा में लाने में यह महोत्सव सेतु का कार्य करेगा और आदिवासियों को जंगल, जमीन, शिक्षा का अधिकार दिलाएंगे। इसके अलावा रोजगार, स्वास्थ्य में फोकस करना है। भाषा, संस्कृति को सहेजने की जरूरत है। कार्यक्रम के दौरान पांच साल की आदिवासी बालिका ने फटका, गमछा मुख्यमंत्री को पहनाया। मुख्यमंत्री ने उसे गोद में उठाकर बच्ची को स्नेह देकर पप्पी ली।

10 राज्यों के जनजाति विषयों पर लिखने वाले एक्सपर्ट प्रस्तुत करेंगे शोध

10 राज्यों के विद्वानों का संगम में जनजातियाें के विकास पर शोध पत्र प्रस्तुत किया जाएगा। छत्तीसगढ़ में जनजातियों के समग्र विकास के लिए प्रदेश सरकार ने जनजातीय साहित्य महोत्सव आयोजित किया है। तीन दिवसीय इस महोत्सव में छत्तीसगढ़ समेत झारखंड, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मेघालय, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, अरुणांचल प्रदेश और कर्नाटक से विद्वान एवं प्रतिष्ठित साहित्यकार जानकारी देंगे।

80 शोधपत्र, 28 प्रोफेसरों के अनुसंधान, 74 रचनाकारों के साहित्य पढ़े जाएंगे

जनजातीय साहित्य के क्षेत्र में कार्य कर रहे शोधार्थियों, साहित्यकारों, रचनाकारों को मंच प्रदान कर जनजातीय साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करने के यह महोत्सव किया जा रहा है। इसमें जनजातियों के विकास संबंधित 80 शोधपत्र, 28 प्रोफेसरों के अनुसंधान, 74 रचनाकारों के साहित्य पढ़े जाएंगे।

इसमें जनजातीय साहित भाषा विज्ञान और अनुवाद, जनजातीय साहित्य में जनजातीय अस्मिता और जनजातीय साहित्य में जनजातीय जीवन का चित्रण, जनजातीय समाजों की वाचिक परंपरा की प्रासंगिकता, जनजातीय साहित्य में अनेकता और चुनौतियां ,जनजातीय साहित्य में लिंग संबंध मुद्दे, जनजातीय कला साहित्य, जनजातीय साहित्य में सामाजिक-सांस्कृतिक संघर्ष जनजातीय साहित्य मुद्दे, चुनौतियां एवं संभावना विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।

विकास के लिए शोधपत्र की पुस्तक तैयार होगी

जनजातीय विकास मुद्दे एवं चुनौतियों पर चर्चा के बाद इनके समाधान वाले शोधपत्र की पुस्तक तैयार होगी। जिसके आधार पर सरकार आदिवासियों के विकास को लेकर कार्ययोजना बनाएगी। उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री समेत तीन पद्मश्री सम्मान प्राप्त लोक संस्कृति के संरक्षण एवं विकास से संबंधित पद्मश्री दम्यन्ती बेसरा, ओडिया पद्मश्री हलधर नाग ओडिसा, पद्मश्री साकी नेती रामचन्द्रा (कोया जनजाति) तेलंगाना उद्घाटन समारोह में विशेष रूप से शामिल होंगे।

जनजातिय नृत्य के साथ प्रदर्शनी

बतादें कि राजधानी रायपुर में देशभर के जनजातीय साहित्यकारों का कुंभ का आयोजन किया जा रहा है। पंडित दीनदयाल आडिटोरियम में 19 अप्रैल से आयोजित किए जा रहे इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय जनजातीय साहित्यकार महोत्सव का शुभारंभ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सुबह 10 बजे किया। इस महोत्सव में जनजातीय नृत्य प्रदर्शन और कला और चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन होगा। इसके अलावा पुस्तक मेला, विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।

बस्तर बैंड व बाल कलाकार सहदेव मुख्य आकर्षण

इसमें बस्तर बैंड का प्रदर्शन, बाल कलाकार सहदेव नेताम और जनजातीय नृत्य मुख्य आकर्षण होगा। अब तक 80 शोधपत्र प्राप्त हो चुके हैं। शोध पत्रों के सारांश को पुस्तक आकार दिया जाएगा। शोधार्थियों को कार्यक्रम में शोध पढ़ने के लिए आमंत्रण भेजा जा चुका है। वरिष्ठ साहित्यकारों और विद्वानों के साथ परिचर्चा के लिए देश के विभिन्न जनजातीय राज्यों एवं विश्वविद्यालयों से लगभग 28 प्रोफेसरों एवं साहित्यकारों की सहमति प्राप्त हो चुकी है। छत्तीसगढ़ राज्य के भी विद्वान जो महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों एवं जनजातीय क्षेत्रों में है, उनकों भी आमंत्रित किया गया है। बस्तर बैंड के कलाकारों के साथ मुख्यमंत्री भी लय, ताल के साथ थिरक उठे।

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