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राज्यपाल अनुसूइया उईके ने सरकार के समावेशी विकास माडल की सराहना की

रायपुर। राज्यपाल अनुसुइया उईके के अभिभाषण के साथ छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र सोमवार से शुरू होगा। राज्यपाल ने सरकार के समावेशी विकास के माडल की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य जनहितकारी विकास के लिए देश और दुनिया में अलग पहचान बनाने में सफल हुआ है।

विपक्ष के सदस्यों की टोकाटाकी के बीच राज्यपाल उईके ने कहा कि स्थानीय संसाधनों और जनता के आत्मगौरव के प्रति सरकार के बेहद संवेदनशील व्यवहार को भरपूर सराहना मिल रही है। प्रदेश के समावेशी विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मैं चाहती हूं कि आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के साथ ही प्रदेश के समग्र विकास में आई तेजी का सिलसिला लगातार जारी रहे और इसमें आप सबका भरपूर सहयोग मिले।

राज्यपाल ने कहा कि मेरी सरकार वास्तव में किसानों, वन आश्रितों और मजदूरों की सरकार है, जिनके आत्म-सम्मान के लिए आय और भागीदारी बढ़ाने की रणनीति अपनाई गई है। खेती के प्रति लोगों का रुझान लौटना अपने आप में बड़ी सफलता मानी जा रही है। खरीफ वर्ष 2021-22 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में अब तक का सबसे बड़ा कीर्तिमान बना है, जिसके अनुसार इस वर्ष लगभग 21 लाख 77 हजार किसानों ने 97 लाख 98 हजार टन धान बेचा है।

सदन में पहले ही दिन विपक्ष का हंगामा और बहिर्गमन, कार्यवाही स्थगित

विधानसभा के बजट सत्र के पहले ही दिन सदन में विपक्ष की तरफ से हंगामा शुरू हो गया है। सदस्यों ने विधानसभा सत्र की अवधि छोटी होने और चर्चा के लिए पर्याप्त समय नहीं होने की बात कहते हुए समय बढ़ाने की मांग की। अध्यक्ष इस पर विचार करने का आश्वासन दिया। इसके बावजूद विपक्ष भाजपा के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन कर दिया।

प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा के सदस्य ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण पर सामान्यता दो दिन चर्चा होती है लेकिन इस बार चर्चा के लिए एक दिन का समय तय किया गया है उसी दिन अनुपूरक बजट पर भी चर्चा होगी। ऐसे में सदस्यों को अपनी बात रखने के लिए कम समय मिलेगा। विपक्ष ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण पर सदन में मंगलवार को चर्चा करा ली जाए और अनुपूरक बजट पर एक दिन बाद बुधवार को चर्चा हो। भाजपा की तरफ से विधायक अजय चंद्राकर ने सोमवार को ही सदन की कार्यवाही पूरे दिन चलाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि हम पूरे दिन बैठने को तैयार हैं। सरकार पूरक कार्य सूची जारी कर दे इसको लेकर सरकार की तरफ से आपत्ति हुई। वही अध्यक्ष ने इस पर विचार करने का आश्वासन दिया लेकिन भाजपा के सदस्य तुरंत फैसला करने की मांग करने लगे जब अध्यक्ष ने तत्काल कोई व्यवस्था नहीं दी तो भाजपा के सभी सदस्य सदन से बाहर चले गए। इसके साथ ही सदन की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

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