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मुख्यमंत्री ने कहा-ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की प्रतिमा लगाने का काम तेज होगा

भोपाल। ओंकारेश्वर में नर्मदा तट पर जगतगुरु आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची धातु की प्रतिमा (स्टेच्यू आफ वननेस) लगाने का काम अब गति पकड़ेगा। बीच में सवा साल का कालखंड आया, जब लगा था कि यह काम भी रुक जाएगा, पर मैंने सरकार से कह दिया कि सब कुछ रोक देना पर ये काम मत रोकना। सरकारों के आने-जाने से बात खराब न हो। यह बात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कही। वे कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में शुक्रवार को आयोजित आचार्य शंकर प्रकटोत्सव कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एकात्मता का मूल ही चेतना है। चेतना के स्तर जैसे-जैसे विकसित होते हैं। एकात्मता का दायरा बढ़ता जाता है। प्रकटोत्सव को आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास ने एकात्म पर्व के रूप में मनाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जड़ एवं चेतन में एक ही चेतना है। पशु, पक्षी, कीट-पतंगे, वनस्पति सब में वही समाया है। सब की पूजा की जाती है। आज जलवायु परिवर्तन की बात हो रही है। अप्रैल माह में 45-47 डिग्री तापमान हो रहा है। यह इसलिए क्योंकि तुमने उनको अपना नहीं माना। उन्होंने कहा कि हमारे ऋ षियों ने हजारों साल पहले बसुधैव कुटुंबकम का संदेश दिया। यही एकात्मता का सूत्र है। अलग-अलग ढंग से सोचने और रास्तों पर चलने के बाद भी अंतत: पहुंचोगे वहीं। भौतिकता की अग्नि में दग्ध मानवता को शांति के पथ का दिग्दर्शन अद्वैत वेदांत, एकात्म दर्शन ही कराएगा। चौहान ने सभी को एकात्मता का संकल्प दिलाया।

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि जिस राज्य ने विश्व को आदि शंकराचार्य के रूप में दर्शन दिया। उस राज्य का राज्यपाल होने का मुझे सौभाग्य मिला। वेदांत को सीमित किया जा सकता है। मुख्यमंत्री की ओर देखते हुए उन्होंने कहा कि आपका यह प्रयास (ओंकारेश्वर प्रकल्प की स्थापना) दूर तक जाएगा। खान ने कहा कि संतों ने नैसर्गिक सिद्धांतों को खोजा और इस भूमि की धुरी को टिका कर रखा। आचार्य शंकर ने भारत की चार दिशाओं में चार मठ स्थापित किए और उन चारों मठों को चार वेदों से चार महावाक्य दिए जो कहते हैं कि जीव दिव्य चैतन्य है। आचार्य शंकर के जीवन के विभिन्न् प्रसंगों का उल्लेख करते हुए खान ने कहा कि भारत का अधिकार है कि इसे विश्व गुरू होना ही चाहिए। भारत ज्ञान और विज्ञान की परंपरा के लिए संपूर्ण विश्व में जाना जाता है।

स्वामी परमात्मानंद सरस्वती ने कहा कि वर्तमान विश्व में अधिकांश समस्याएं हमारे व्यक्ति केंद्रित होने के कारण उत्पन्न् हुई हैं। भारतीय दर्शन सदैव सिद्धांत केंद्रित रहा है। जब विभिन्न् मत मतांतरों में एकता लाने की आवश्यकता हुई तब आचार्य शंकर का प्रादुर्भाव हुआ और उन्होंने करुणा पूर्ण रूप से सभी मतों को संस्कारित कर वैदिक दर्शन अद्वैत वेदांत दर्शन का प्रचार किया। कार्यक्रम में कर्नाटक शैली के गायक सूर्यगायत्री व राहुल वेल्लाल ने आचार्य शंकर रचित स्तोत्रों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में आचार्य शंकर न्यास के न्यासी स्वामी परमात्मानंद सरस्वती, मार्कंडेय आश्रम ओंकारेश्वर के स्वामी प्रणवानंद और स्वामी वेदतत्त्वानंदपुरी उपस्थित रहे।

इन्हें सम्मानित किया

मध्य प्रदेश में अद्वैत वेदांत के लोकव्यापीकरण में योगदान देने के लिए मार्कंडेय संयास आश्रम, ओंकारेश्वर के आचार्य स्वामी प्रणवानंद सरस्वती एवं डा. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर के प्राध्यापक प्रोफेसर अंबिका दत्त शर्मा को सम्मानित किया गया।

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