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संविदा व्यवस्था पर स्थाई रूप से रोक लगे

(डॉ. चंदर सोनाने)

प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री  शिवराजसिंह चौहान ने एक बात बहुत खरी- खरी कही है। हाल ही में उन्होंने शहडोल में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि सरकारी विभागों में संविदा व्यवस्था पूरी तरह शोषण करने वाली है। मैं भी इसके बिलकुल खिलाफ हूँ। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए यह भी कहा कि जो आंदोलन नहीं कर रहे हैं मैं उनसे बात कर रहा हूँ । जो आंदोलन कर रहे है उनसे कोई बात नही होगी । मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में अध्यापकों और पचांयत सचिवों को राहत दी जा चुकी है।
किंतु मुख्यमंत्री ने अभी तक जो कहा उसके बारे में कुछ ठोस कार्रवाई नहीं की है। यदि वे यह मानते है कि संविदा व्यवस्था शोषण करने वाली है तो उन्हें चाहिए की मध्यप्रदेश के सभी विभागों में संविदा व्यवस्था पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के आदेश जारी करें। इसके साथ ही वर्तमान में विभिन्न विभागों में जो संविदा कर्मचारी काम कर रहे हैं उनके नियमितीकरण के लिए नियम बना देंवे। एक बार नियम बन जायेंगें तो नियमितीकरण की कार्रवाई आसान हो जाएगी।
प्रदेश में विभिन्न विभागों में मोटे तौर पर करीब डेढ़ लाख संविदा कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन डेढ़ लाख कर्मचारियों को यदि नियमितीकरण का तोहफा मिलता है तो डेढ़ लाख कर्मचारी इससे लाभांवित हो सकेंगे। और वे राज्य सरकार का शुक्रगुजार होंगे। मजेदार बात यह है कि नियमित कर्मचारियों के लिए जो निर्धारित योग्यता ह,ै वह संविदा कर्मचरियों की भी योग्यता है। उसकी नियुक्ति प्रक्रिया भी लगभग नियमित कर्मचारियों के समान ही होती है। किंतु संविदा कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों से बहुत कम वेतन पर काम करना पडता है। यही नहीं संविदा कर्मचारियों को नियमित वेतनमान नहीं मिलते हुए एक निश्चित राशि मिलती है, जो उसी पद के नियमित कर्मचारियों की तुलना में बहुत कम होती है। इसके अलावा संविदा कर्मचारियों को वे सब लाभ भी नहीं मिलते है जो नियमित कर्मचारियों को सहज ही मिल जाते हैं।
इस वर्ष के अन्त में मप्र में विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं । राज्य सरकार और प्रदेश के मुख्यमंत्री पुरजोर कोशिश कर रहे हैं कि इस बार भी उनकी ही सरकार बने। इसके लिए मुख्यमंत्री हर तबके के लोगों को राहत देने में लगे हैं। मुख्यमंत्री द्वारा अभी तक किसानों,मजदुरों,आंगनवाडी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं, अध्यापकों, पंचायत सचिवों आदि के लाभ के लिए अनेक घोषणाएँ कर चुके हैं। अब वे हर तबके के लोगों को लाभ देने के प्रयास में हैं।
मुख्यमंत्री द्वारा हर एक को खुश करने के प्रयास कर रहे हैं, किंतु 1 जनवरी 2016 के पहले अर्थात 31 दिसंबर 2015 तक सेवानिवृत हो चुके अधिकारियों और कर्मचारियों को सातवें वेतनमान देने से पता नही क्यां अभी तक आनाकानी कर रहे हैं। उक्त तिथि के पहले सेवानिवृत होने वाले पेंशनर मुख्यमंत्री की और आशाभरी निगाहों से देख रहे हैं। यदि मुख्यमंत्री इस और भी ध्यान देंगे तो निश्चित रूप से वरिष्ठ नागरिकों को लाभ मिलेगा और वे दुआ देंगे।

 

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