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अब सीखना होगा कोरोना के साथ जीना, सावधानी और सुरक्षा के जपना होगा मंत्र

 

[mkd_highlight background_color=”” color=”red”]विनीत दुबे, [/mkd_highlight]

 

 

 विश्व भर के देशों में कोविड 19 यानि कोरोना का कहर चल रहा है। हर दिन लाखों लोगों के नाम कोरोना संक्रमितों की सूची में शामिल हो रहे हैं तो हजारों की संख्या में लोगों के नाम मृतकों की सूची में दर्ज हो रहे हैं। कोविड- 19 यानि कोरोना अब हमारी जिन्दगी में ठीक उसी तरह से आ गया है जैसे कभी एड्स नामक बीमारी आई थी। लोगों ने एड्स के साथ भी जीना सीख लिया है ठीक उसी तरह से कोरोना के साथ भी हमे जीना सीखना पड़ेगा। विश्व भर के वैज्ञानिक इस बात को पुख्ता तौर पर कहते हैं कि यह वायरस पूरी तरह से खत्म नहीं होगा क्योंकि किसी भी वायरस को पूरी तरह से खत्म करने में दशकों का समय लग जाता है।

अब सवाल यह उठता है कि कोरोना खत्म होगा, पुख्ता वैक्सीन है नहीं, लाॅक डाउन के अपने फायदे और नुकसान हैं, तो आखिर आम आदमी कब तक इस अनिश्चितता के भंवर में गोते लगाएगा। मेरा मानना है कि आने वाले कुछ सालों तक हमें कोरोना के बीच में ही रहने का मन बना लेना चाहिए और इस वायरस के फैलाव से बचाव का साधनों का उपयोग के साथ ही अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए। इटली, फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों में स्कूली बच्चों को कोरोना प्रकोप के बीच इसके प्रभाव से बचाव के बारे में पढ़ाया भी जाने लगा है।
केन्द्र और राज्य स्तर पर सरकारों को प्रयास करना चाहिए कि लोगों को सामाजिक दूरी, मास्क और सेनिटाजर के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाए। मास्क और सेनिटाजर कम से कम कीमतों पर आसानी से उपलब्ध कराने के लिए भी कार्य किए जाने चाहिए। गांवों , स्कूलों , कारखानों, बसों मेें , बस अड्डों पर,  होटलों , ढाबों में हर जगह सामाजिक दूरी, मास्क और सेनिटाजर के उपयोग का सख्ती के साथ पालन कराना आवश्यक है।

अभी तक सरकारों ने सिर्फ घरों में रहने और लाॅक डाउन का पालन करने के लिए अपील की है तो भारत का हर नागरिक यही विचार कर रहा है कि बस 3 मई के बाद सब कुछ वैसा ही हो जाएगा जैसे पहले था। अब समय आ गया है कि हमें लोगों को बताना होगा कि जब तक कोरोना वायरस का सटीक इलाज नहीं आ जाता तब तक सावधानी में ही सुरक्षा है का मंत्र जपना होगा। मुंह पर मास्क लगाकर और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए काम करना पड़ेगा। अब घर बैठे भोजन नहीं मिलेगा काम करना ही पड़ेगा।

–क्या लाॅक डाउन से हल होगी समस्या 

कोरोना संकट से निजात के लिए लाॅक डाउन सिर्फ एक प्रयास है कि वर्तमान में दवाओं और साधनों अभावों में रोगियों की संख्या की बढ़ोत्तरी को रोका जा सके। कोई भी सरकार आखिर कब तक लोगों को घरों में रहने के लिए विवश कर पाएगी। क्या सरकार लोगों को महीनों तक दो जून की रोटी दे पाएगी यह भी संभव नहीं है। ज्यादा दिनों तक लोग यदि घरों में रहे तो सरकार पर इनकी सहायता का दवाब बढ़ने लगेगा और सरकार तो खुद आम जनता से सहयोग मांग रही है। इसीलिए लाॅक डाउन इस प्रकोप का समाधान नहीं है वहीं भारत में एक माह के लाॅक डाउन से सरकार की तिजोरी खाली हो गई तो आम आदमी की क्या बिसात है। इसलिए लाॅक डाउन 2- 4 महीने तक भी नहीं खींचा जा सकेगा। इन सब बातों के बीच लाॅक डाउन-2 के अंतिम दिन यानि 3 मई के पहले प्रधानमंत्री के संभावित संबोधन पर देश की 130 करोड़ जनता की निगाहें टिकी हैं। क्या पता सब कुछ पहले जैसा हो जाए या वे फिर कहें बहनों भाइयों आप लोगों से मुझे और 18, 20 या फिर 30 दिन चाहिए।

 

 

 ( लेखक मप्र के सीहोर जिले के  स्वतंत्र पत्रकार है )

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