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बाजीराव और मस्तानी बाई के वंशज शायर जुबेर बहादुर जोश का निधन

 

[mkd_highlight background_color=”” color=”red”]रघुवर दयाल गोहिया[/mkd_highlight]

 

मध्यप्रदेश। उप्र की बांदा रियासत से ताल्लुक रखने वाले प्रसिद्ध शायर नवाब जुबेर बहादुर जोश का तीन दिन पहले इंदौर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया| वह कुछ दिनों पहले ही सीहोर स्थित बांदा कम्पाउंड में अपने मकान का मेंटेनेंस कार्य कराने आये थे| बाजीराव और मस्तानी बाई के वंशज,झांसी की रानी लक्ष्मी बाई के साथ अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई लड़ने वाले नवाब अली बहादुर के रक्त संबंधी जुबेर बहादुर की शिक्षा दीक्षा सीहोर में ही हुई थी| वह होंकी और क्रिकेट के बेहतरीन खिलाड़ी थे। उन्होंने होंकी में विक्रम विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया और बाद में मप्र सिविल सर्विसेस की टीम से खेलते रहे। इसके साथ ही उनकी शायरी भी चलती रही। उनके कुल चार संकलन प्रकाशित हुए हैं जिनके नाम मेरी गजलें मेरे गीत, तर्जे सुखन,अलफाज के फूल और अहसास की खुशबू शामिल है। शायरी का शौक उन्हें विरासत में मिला था। इंदौर के उर्दू अदब में उनके दादा हुजूर उमराव बहादुर दिलेर का दीवान बागे दिल फरेब 1911 में प्रकाशित हुआ था। इंदौर के उर्दू अदब में संभवतः यह पहला संकलन प्रकाशित हुआ था ऐसा कहा जाता है। प्यार, मोहब्बत, राष्ट्रीय एकता आदि उनकी शायरी के प्रमुख विषय रहे हैं। उन्हें प्रदेश की अनेक साहित्यिक संस्थाओं ने सम्मानित भी किया है।
जुबेर बहादुर जोश के निधन पर सीहोर के साहित्य जगत में भी शोक व्याप्त है। अनके साहित्य प्रेमियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है| एक जिंदा दिल इंसान और सभी वर्ग, धर्म के लोगों से हमेशा हँसते मूस्कुराते हुए मिलने वाले जोश साहब की कमी उर्दू अदब के साथ खासतौर से सीहोर, भोपाल और इंदौर वासियों को हमेशा खलती रहेगी।

( लेखक वरिष्ठ पत्रकार है ) 

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