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चैरी चैरा आंदोलन में 172 लोगो की फांसी की सजा 19 में तब्दील कराने वाले स्वतंत्रता संग्राम के राष्ट्रीय अभियान के वीर सेनानी बाबा राघव दास – प्रो. हिमांशु चतुर्वेदी

—आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर ब्राउस महू एवं हेरिटेज सोसाईटी पटना के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित होने वाले एक वर्षीय साप्ताहिक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों का प्रथम व्याख्यान

मध्यप्रदेश । “आजादी का अमृत महोत्सव“ के अवसर पर डॉ. बीआर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय, महू तथा हेरीटेज सोसाईटी, पटना, बिहार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक वर्षीय साप्ताहिक राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, संगोष्ठी एवं व्याख्यानमाला का प्रथम व्याख्यान कार्यक्रम का स्वागत भाषण हेरीटेज सोसाईटी पटना के महानिदेशक डॉ. अनंताशुतोष द्विवेदी द्वारा किया गया। आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम की अध्यक्षा कुलपति ब्राउस, प्रोफेसर आशा शुक्ला, ने अपने परिचय वक्तव्य में सभी सम्मानित जनो का स्वागत करते हुए यह बतलाने का प्रयास किया कि यह विश्वविद्यालय आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर वर्ष भर प्रत्येक सप्ताह बुधवार को किसी एक स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियो को इन कार्यक्रम के माध्यम से न केवल याद करेगा वल्कि उनके त्याग और बलिदान की गाथा विस्तृत वर्णन रिपोर्ट के माध्यम से समाज को उपलब्ध भी कराएगा।

मुख्य वक्ता प्रो. हिमांशु चतुर्वेदी, सदस्य, नई दिल्ली, ने इतिहास की समस्याएं चैरी चोरा पुनरावलोकन विषय पर अपना वक्तव्य प्रारंभ किया। आजादी का यह अमृत महोत्सव एक राष्ट्रीय त्योहार है जो उन वीर शहीदों को न केवल याद करेगा जिन्होंने अपनी आहुति इस स्वतन्त्रता संग्राम में दी है बल्कि यह कार्यक्रम प्रत्येक भारतीय युवाओं के हृदय में एक प्रेरणा स्रोत बनकर उभरेगा। जहां हमें अपने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के सही पक्षों को देखने का अवसर भी प्राप्त होगा। आपने चैरी चैरा पुनरावलोकन जैसे विषय पर लगातार 3 वर्षों तक गहन शोध अध्ययन और संकलन का कार्य किया है। भारत की विभिन्न केंद्रीय समितियों के माध्यम से आपने विस्तृत रिपोर्ट भी प्रकाशित की हैं। भारतीय इतिहास के संबंध में 9 स्तंभों की गैलरी जो भारतीय इतिहास की रूपरेखा को प्रदर्शित करती है जिसके दो आधार आपने बतलाए प्रथम इतिहास जो जन सामान्य हेतु उपयोगी हो। दूसरा इतिहास की प्रमाणिकता होनी चाहिए तथा साक्ष्य एवं समुचित प्रमाण भी उपलब्ध होने चाहिए जिसमें प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त हो सके इतिहास की प्रमाणिकता बहुत ही महत्वपूर्ण है। इतिहास की घटना महत्वपूर्ण नहीं है लेकिन घटना की पटकथा छंततंजपअम बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। आपने यह बात अपने वक्तव्य में कई बार उल्लेख की । हिस्ट्री इज नॉट इंपोर्टेंट बट द नैरेटिव ऑफ द हिस्ट्री इज मोस्ट इंपोर्टेंट। आप के अध्ययन के दौरान यह देखने को मिला है कि भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम अभियान तथा सभी राष्ट्रीय आंदोलनों के साथ ब्रिटिश हुकूमत के कारण बहुत छेड़छाड़ की गई है और जो समाज के मध्य में इतिहास प्रस्तुत है वह उस तरह नहीं है जिस तरह की इतिहास घटित हुआ है आपने इसके संबंध में कई बातों का उल्लेख किया । आपने चैेरी चैेरा आंदोलन में हुई संपूर्ण घटनाक्रम का बड़ा ही सार बोधक और महत्वपूर्ण वक्तव्य रखा। आपने यह बताने का प्रयास किया कि चैरी चैरा आंदोलन जलियाबाग आंदोलन के साथ कहीं ना कहीं मिलता जुलता है । ब्रिटिश काल में काला पानी और मांडले ले की सजा कितनों को दी गई और वह सूची कहां है इस संदर्भ में यह देखने को मिला कि भारतीय इतिहास के किसी भी पुस्तक में यह नहीं मिलता कि कितने लोगों को काला पानी और मानले की सजा मिलती है लेकिन यह बात जरूर स्पष्ट हुई कि इस प्रकार की सजाएं उन्हीं को दी गई जिन से ब्रिटिश लोग डरते थे। इसके संबंध में लंबी विस्तृत चर्चा मिलती है । इन सभी आंदोलनों में बाल गंगाधर तिलक, वीर सावरकर, सुभाष चंद्र बोस, अरविंद, सरदार बल्लभ भाई पटेल जैसे महान क्रांतिवीर सेनानियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
आपने आर.सी. मजूमदार द्वारा जो डॉक्यूमेंट प्रस्तुत किया गया था उसका उल्लेख भी किया। आपने अपने यशस्वी वक्तव्य में बाबा राघव दास के महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख भी किया। चैेरी चैेरा की जो घटना घटित हुई उस घटना में सेशन कोर्ट ने एकतरफा 172 लोगों को हत्या के अपराध ने फांसी की सजा सुनाई थी बाबा राघव दास उस समय जलियांवाला हत्याकांड के सिलसिले में जेल में थे जेल से मुक्त होने के बाद उन्होंने उस चैकी के सामने जाकर एक जनसभा आयोजित की और जनसभा आयोजित करने के बाद उन्होंने कुछ धन एकत्रित करके चैेरी चैेरा आंदोलन में जो सजा सुनाई गई थी उन 172 लोगों के बचाव में इलाहाबाद जाकर पंडित मदन मोहन मालवीय जी से हाई कोर्ट में रिट दायर करने की बात रखी पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने आपकी बात स्वीकार करते हुए और यह रिट दायर की और बाद में हाईकोर्ट ने उन 172 लोगों की फांसी को कम करते हुए केवल 19 लोगों को ही सजा सुनाई यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू है सबके समक्ष रखा हाई कोर्ट मे बहस के दो आधार बने हाईकोर्ट में पहला चोरी चोरा आंदोलन के दौरान जो चैकी में आग लगाई गई इरादतन हत्या नहीं थी दूसरा यह चोरा चोरी आंदोलन हुआ क्यों उसकी वजह निकली पुलिस ने निहत्थे लोगों पर अंधाधुंध फायरिंग की इस वजह से दो-तीन लोग वही शहीद हो गए इससे आक्रोशित उस भीड़ ने चैकी को जला दिया इससे यह स्पष्ट हुआ कि उस समय की ब्रिटिश काल का जो अंधा कानून चल रहा था उस के संदर्भ में यह चोरा चोरी आंदोलन देखने को मिला और बाद में भारत सचिव के द्वारा ऐसे निर्देश भी जारी हुए की आंदोलनकारियों को और निहत्थे लोगों के ऊपर फायरिंग ना की जाए। आपने अपने महत्वपूर्ण वक्तव्य में एसपी परांजपे जो उस समय उनके द्वारा किए जा रहे प्रकाशन कार्यों का उल्लेख भी किया । आपने 5 फरवरी 1921 के असहयोग आंदोलन जो गांधी जी द्वारा चल़ाया जा रहा था का उल्लेख भी किया। मुख्य वक्तव्य से यही स्पष्ट हो रहा था कि किसी भी ऐतिहासिक घटना महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि उस घटना की पटकथा बहुत महत्वपूर्ण है । यह घटना निश्चित रूप से हमारे युवाओं को जानने की आवश्यकता है । इस भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े सभी क्षेत्र संग्रहालय और संबंधित सभी व्यक्तियों को एकजुट होकर आजादी के अमृत महोत्सव में शामिल होकर एक राष्ट्र चेतना राष्ट्रप्रेम, राष्ट्र सेवा और राष्ट्रीय अभियान को पुनः ताजा करना होगा जिससे आने वाली युवा पीढ़ी हमारे देश के इस महान अभियान को याद रख सके । कार्यक्रम की अध्यक्षा कुलपति ने मुख्य वक्ता से आगे भी इस प्रकार से पांच और व्याख्यान को रखने की बात रखी। धन्यवाद ज्ञापन हेरीटेज सोसाईटी पटना के महानिदेशक डॉ अनंत आशुतोष द्विवेदी ने किया। निश्चित रूप से आज का यह उदघाटन सत्र आने वाले कार्यक्रमों को तथा समाज के नौजवानो को हमारे गौरवशाली स्वतंत्रता संग्राम की पुनः न केवल याद दिलाएगा अपितु उनमे राष्ट्र प्रेम की भावना जगाने में सफल होगा।

कार्यक्रम में प्रशासनिक संयोजक अजय वर्मा, कुलसचिव ब्राउस, अकादमिक संयोजक प्रोफेसर डी. के वर्मा डीन ब्राउस, डॉ० मनीषा सक्सेना, डीन ब्राउस, सहायक कुलसचिव संध्या मालवीय एवं ब्राउस के सभी पदाधिकारी शिक्षक गण, हेरीटेज सोसाईटी पटना के सम्मानित प्रबुद्ध जन, शोधार्थी एवं विद्यार्थी गण सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का संचालन हेरीटेज सोसाईटी पटना के महानिदेशक डॉ अनंत आशुतोष द्विवेदी द्वारा किया गया। निश्चित रूप से आज का यह उदघाटन सत्र आने वाले कार्यक्रमों को एक उत्साह एवं प्रेरणा दायी सिद्ध होगा। आजादी का अमृत महोतसव के समन्वयक डॉ अजय दुबे द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। कार्यक्रम में तकनीकी सहयोग हेरीटेज सोसाईटी पटना के आजाद हिंद गुलशन नंदा द्वारा किया गया।

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