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कोविड वैक्‍सीन की कीमतों के मामले में केंद्र ने किया हस्तक्षेप, कहा- दाम कम करें कंपनियां

नई दिल्‍ली। देश में कोरोना वैक्सीन बनाने वाली दोनों कंपनियों सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (एसआइआइ) और भारत बायोटेक की ओर से राज्यों और निजी अस्पतालों को अधिक कीमतों पर वैक्सीन देने के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप किया है। सूत्रों के अनुसार सोमवार को कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता में वैक्सीन की कीमतों को लेकर हुई लंबी बैठक में तमाम मुद्दों पर चर्चा हुई और उसके बाद कंपनियों से अपनी कीमतें कम करने को कहा गया। माना जा रहा है कि दोनों कंपनियों की ओर से जल्द ही कोई नया प्रस्ताव आएगा।

दोनों कं‍पनियों ने तय कर दी थीं कीमतें

सीआइआइ ने भारत में अपनी वैक्सीन कोविशील्ड की कीमत केंद्र सरकार के लिए 150 रुपये, राज्यों के लिए 400 रुपये और खुले बाजार के लिए 600 रुपये प्रति डोज तय की है। इसके बाद भारत बायोटेक ने शनिवार को बताया कि उसकी कोवैक्सीन की कीमत राज्यों के लिए 600 रुपये, निजी क्षेत्र के लिए 1,200 रुपये और निर्यात के लिए 15 से 20 डालर प्रति डोज होगी। कोवैक्सीन भी केंद्र सरकार के लिए 150 रुपये प्रति डोज की दर से उपलब्ध है।

वैक्‍सीन की कीमतों पर सियासत

मालूम हो कि दोनों कंपनियों ने पहले स्पष्ट कर दिया था कि केंद्र सरकार के लिए कम कीमत इसलिए थी क्योंकि उसने एडवांस पेमेंट किया था और उस वक्त वैक्सीन को लेकर पूरा अध्ययन भी नहीं हुआ था। बहरहाल, विपक्ष की तरफ से इसे मुद्दा बनाने की लगातार कोशिश हो रही है। कांग्रेस ने ‘एक देश-वैक्सीन की एक कीमत’ की मांग की है। इस बारे में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है।

कांग्रेस शासित राज्‍यों ने खड़े कर दिए थे हाथ

दरअसल कांग्रेस शासित राज्यों ने पहली मई से सभी बालिगों के लिए टीकाकरण शुरू करने पर हाथ खड़े कर दिए थे। कांग्रेस शासित राज्यों छत्तीसगढ़, पंजाब, राजस्थान और झारखंड (झामुमो शासित) के स्वास्थ्य मंत्रियों ने रविवार को एक स्वर में केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा था कि जिस तरह से उनको 45 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए मुफ्त में वैक्सीन उपलब्‍ध कराई गई उसी तरह 18 से ज्यादा की उम्र के लोगों के लिए भी मुफ्त वैक्सीन उपलब्‍ध कराई जानी चाहिए।

एक दो दिनों में हो सकता है अंतिम फैसला

वैक्सीन की कीमतों को लेकर सरकार अगले एक-दो दिनों के भीतर ही अंतिम फैसला करना चाहती है क्योंकि एक मई, 2021 से देश में 18 वर्ष से ज्यादा आयु वर्ग के लोगों को वैक्सीन लगाने का अभियान शुरू होने जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार ने कंपनियों को वैक्सीन आपूर्ति में ढील भी देने का एलान किया है। कंपनियों से कहा गया है कि वे 50 फीसद वैक्सीन केंद्र को दें, शेष 50 फीसद वे राज्य सरकारों या निजी सेक्टर को खुले बाजार में बेचने को स्वतंत्र होंगी।

कीमतें नीचे लाने में मिलेगी मदद

पहले केंद्र ने कहा था कि जो भी कीमतें कंपनियां तय करेंगी उसका एलान उन्हें पहले करना होगा ताकि इस बारे में पूरी पारदर्शिता हो। केंद्र का यह भी मानना है कि जब राज्यों और निजी सेक्टर से बड़ी संख्या में वैक्सीन की मांग आएगी तो इससे कीमतें नीचे लाने में मदद मिलेगी। यह संभावना एसआइआइ और भारत बायोटेक के प्रमुखों ने भी हाल में जताई थी। केंद्र सरकार का भी मानना है कि भविष्य में कुछ और वैक्सीन निर्माता कंपनियों के आने से भारत में कीमतें कुछ और नीचे जा सकती हैं।

कई कंपनियां आपूर्ति को तैयार

रूस की स्पुतनिक वैक्सीन का निर्माण व आयात डा. रेड्डीज मई से शुरू करने जा रही है। कंपनी ने कहा है कि भारतीय बाजार में इसकी एक डोज की अधिकतम कीमत 10 डालर (तकरीबन 750 रुपये) हो सकती है। इसी तरह अमेरिकी कंपनी फाइजर ने सरकार को आश्वस्त किया है कि अगर उसे भारत में वैक्सीन बनाने की इजाजत मिली और सरकारी खरीद होती है तो वह नाट फार प्राफिट मार्जिन (बिना मुनाफा कमाये) पर देने को तैयार है।

केजरीवाल ने भी कीमतों पर उठाए थे सवाल

वहीं कांग्रेस महासचिव और मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार मुनाफाखोरों को 1.11 लाख करोड़ रुपए की मुनाफाखोरी करने की अनुमति दे रही है। उनका कहना था कि सरकार ने गरीबों को मुफ्त वैक्‍सीन उपलब्ध कराने की अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविद केजरीवाल ने भी प्रधानमंत्री के साथ बैठक में इस मुद्दे को उठाया था। उनका कहना था कि यह समय कंपनियों के लिए सुपर-प्राफिट कमाने का नहीं है।

नकवी ने किया था पलटवार

वहीं सरकार की ओर से सियासी मोर्चा संभालते हुए केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा था कि जो लोग पहले कोरोना के स्वदेशी टीकों के प्रभाव पर भय पैदा कर रहे थे… अब वो टीकों की कीमत पर भ्रम पैदा कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस मुश्किल वक्‍त में सभी को समाधान का हिस्सा बनना चाहिए… ना की भय और भ्रम का किस्सा गढ़ना चाहिए…

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