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नौतपा 2021 : आने वाली सदी में नौतपा का नामकरण हो सकता है नववर्षा

—ग्रहण की तरह नौ तपा को अब वैज्ञानिक रूप से समझने की जरूरत
— साल 2021 में नौतपा 25 मई से 2 जून तक

नवतपा विदाई की बेला मे है, तूफान और बादलों ने बाधा बनकर न लू चलने दी और न तपन को रिकार्ड बढ़ाया। नौतपा के आरंभ होते ही आमलोग ऐसी मानसिक तैयारी में जुट जाते है जैसे कड़कड़ाती ठंड के बाद अगले ही दिन पसीने छूटने वाले हों। लेकिन इंतजार के बाद हर साल 25 मई से 2 जून तक की अवधि में घटित होने वाली नौतपा की खगोलीय घटना में जब बादल आ जाते है तो लगता है कि नौतपा बन गया नहींतपा । नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने माॅडल की मदद से नौतपा का खगोल विज्ञान बताया।
इसमें सारिका घारू ने बताया कि जब सूर्य की परिक्रमा करते हुये 365 दिन बादपृथ्वी उस स्थिति में आ जाती है जबकि सूर्य के पीछे वृषभ तारामंडल का स्टार रोहिणी आ जाता है तो इसके पहले नौ दिन नौतपा कहलाते हैं।
सारिका ने बताया कि वर्तमान पीढ़ी के लिये हर साल 25 मई को सूर्य के पीछे रोहिणी तारा आ जाता है। सूर्य के पीछे रोहिणी तारा आने की यह घटना सन 1000 में 11 मई को हुआ करती थी। सन 1200 में 13 मई और सन 1400 में यह घटना 17 मई को आरंभ होती थी। संभवतः एक हजार साल पहले इस अवधि में भारत के मध्यभाग में तीव्र गर्मी होने से इसे नौ तपा के रूप में नामकरण किया गया होगा।
सारिका ने बताया कि पृथ्वी के अक्ष के 26000 सालों में घूमने की प्रसेशन घटना के कारण यह लगभग हर 100 साल में रोहिणी के सामने आने की यह दिनांक आगे बढ़ती जा रही है। वर्तमान समय में यह घटना अब हर साल 25 मई को होने लगी है। 1 जून को केरल में मानसून पहुंचने के पहले मध्यभारत में भी मौसम में बदलाव आने लगता है। हवायें चलने लगती हैं , कई बार तूफान भी आ जाते हैं। इसलिये नौतपा बादलों के छा जाने से अब अंग्रेजी के शब्द नो (NO) तपा में बदलता दिखता है। इसके अलावा वर्तमान में गर्मी से बचने के वैज्ञानिक साधनों के बीच रहते हुये भी गर्मी का अहसास कम ही होता है।
सारिका ने बताया कि आने वाली पीढियों के लिये नवतपा कम ही तपेगा क्योंकि रोहिणी के सीध में आने की घटना स्वतंत्रता प्राप्ति के 300 साल पूरे होने पर 2247 में 29 मई को आरंभ हुआ करेगा। समय के साथ यह जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई में भी हुआ करेगा और तब संभवतः इसका नाम नौ तपा से बदलकर नववर्षा हो सकता है।

क्या रोहिणी तारा का है गर्मी से संबंध-

सारिका ने बताया कि पृथ्वी के किसी भाग पर गर्मी वहां पड़ रही सूरज की सीधी किरणों के कारण होती है। गर्मी बढ़ाने में नक्षत्र की भूमिका रहती तो मकर रेखा में स्थित देषो में इस समय दिन का तापमान कम क्यो रहता। रोहिणी , पृथ्वी से 65 लाईट इयर दूर है इसका मतलब यह हुआ है कि इस साल सूरज रोहिणी के सामने आया अगर यह संदेश रोहिणी तक प्रकाश की गति से चले तो भी 65 साल बाद 2086 में पहुंचेगा।
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सदी आरंभ का साल नौतपा आरंभ की दिनांक एवं समय
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सन 1000 11 मई , रविवार 4ः13 पीएम
सन 1100 13 मई , रविवार 7ः03 एएम
सन 1400 17 मई , शनिवार 5ः09 एएम
सन 1500 18 मई , शुक्रवार87ः24 पीएम
सन 1600 19 मई , शुक्रवार 11ः25 एएम
सन 1700 21 मई , शुक्रवार 02ः42 एएम
सन 1800 22 मई , गुरूवार 05ः56 पीएम
सन 1900 24 मई गुरूवार 08ः23 एएम
सन 2001 25 मई शुक्रवार, 06ः08 एएम
सन 2100 26 मई बुधवार 02ः54 पीएम
सन 2200 28 मई बुधवार 05ः52 एएम
साल 2247 29 मई शनिवार 07ः04 एएम

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