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आंकड़ों की बाजीगरी में उलझा है 20 लाख करोड़ का पैकेज

 

[mkd_highlight background_color=”” color=”red”]विनीत दुबे[/mkd_highlight]

 

 

मध्यप्रदेश । बीती रात देश के प्रधानमंत्री ने कोरोना से जंग जीतने के लिए देश को 20 लाख करोड़ रूपए के राहत पैकेज की घोषणा की। अपने लंबे भाषण में उन्होेंने जहां अपनी सरकार के प्रयासाों का गुणगान किया तो विपक्ष की पूर्ववर्ती सरकार को भी कहीं न कहीं कटघेरे में खड़े करने का प्रयास भी किया। अपने भाषण में वे लगातार 20 लाख करोड़ रूपए की बात करते रहे और आम तौर पर टीवी चैनलों में आने वाले सास बहू टाइप सीरियलों की भांति शेष अगली कड़ी में बोलकर चल दिए।

प्रधानमंत्री के भाषण के बाद देश भर के न्यूज चैनलों ने बुद्धीजीवियों को कुरेद कुरेद कर प्रधानमंत्री के भाषण का सार जानने का प्रयास किया। नजीता हालांकि कुछ नहीं निकला लोग भी अपने खातों में आने वाले 15 लाख रूपयों के बारे में विचार करते हुए नहीं के आगोश में पहुंच गए।

बुधवार शाम चार बजे केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण एवं वित्त राज्यमंत्री अनुरागसिंह ठाकुर ने कल के सीरियल की अगली कड़ी प्रस्तुत की जो एक बारगी आंकड़ों की बाजीगरी से अधिक कुछ प्रतीत नहीं होती है। राहत पैकेज में जो बातें कहीं कई हैं उनमें बहुत सारे पेंच हैं इन पेंचों का सामना करना आसान भी नहीं लगता है।
वित्तमंत्री ने बताया कि कुटीर, लघु, मध्यम उद्योगों को बिना किसी गारंटी के चार साल के लिए कर्ज दिया जाएगा और एक साल तक मूलधन की किश्त नहीं ली जाएगी। इसके लिए 3 लाख करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।

सवाल यह है कि बैंकों की हालत दयनीय है वर्तमान में बैंकों द्वारा गारंटी पर भी लोन नहीं दिया जा रहा है तो फिर यह बिना गारंटी का कर्ज कैसे प्राप्त होगा। देश के अधिकांश छोटे और मझौले उद्योग धन की कमी के कारण बैंकों के ओवरड्यूज की स्थिति में चल रहे हैं ऐसे उद्योंगों को बैंक भी सहयोग नहीं कर पाएंगे। दूसरी ओर जब बैंकों द्वारा लाकडाउन 2 के दौरान प्रधानमंत्री की अपील बाद भी अपने कर्ज की वसूली बंद नहीं की तो वे प्रधानमंत्री के कहने पर बिना गारंटी के कर्ज कैसे देंगे यह बात अभी आसान नहीं लगती है।

इसके अलावा 30 हजार करोड़ हाउसिंग फायनेंस कंपनियों, 90 हजार करोड़ बिजली कंपनियों को सहायता के अलावा 15 हजार से कम वेतन वाले कर्मचारियों को ईपीएफ की राशि तथा ईपीएफ कटौत्री की दर में 2 प्रतिशत की कमी, टीडीएस कटौत्री में 25 प्रतिशत की राहत दिए जाने को 20 लाख करोड़ के पैकेज में शामिल किया गया है। हाउसिंग फायनेंस कंपनियों द्वारा आम जनता को राहत प्रदान की जाएगी इसमें भी संदेह है पिछले एक साल के दौरान रिजर्व बैंक ने कर्ज की दरों में कटौती की है बावजूद इसके अधिकांश हाउसिंग फायनेंस कंपनियों ने अपने ग्राहकों को कर्ज के ब्याज दरों में राहत प्रदान नहीं की है।

इस राहत पैकेज के बाद भी हाउसिंग फायनेंस कंपनियों से आम जनता को राहत की उम्मीद कम ही नजर आती है। इसके अलावा देश भर में ईपीएफ खातों की संख्या करीब 19 करोड़ है वहीं सरकार ने कुल 97 लाख ईपीएफ खातों में राशि जमा कराने की बात कही है ऐसे में 18 करोड़ से अधिक कर्मचारियों को इस पैकेज का लाभ ही नहीं मिल पाएगा। टीडीएस कटौत्रा भी किसी राहत का कारक नहीं है क्योंकि जो टीडीए काटा जाता है वह रिटर्न दाखिल करने के बाद वापस हो जाता है।

इसके पहले भी प्रधानमंत्री राहत पैकेज की घोषणा की गई थी जिसमें किसानों की दी जाने वाले 2 हजार रूपए तथा बुर्जुगों की पेंशन की राशि एडवांस में देने तथा राशन का सामान एडवांस वितरण को भी राहत पैकेज में बताया गया था जबकि वह तो नियमित व्यवस्था का ही अंग था।

अभी तो 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज के कुछ और भी ऐपीसोड आने बाकी हैं देखना वे ऐपीसोड भी इसी तरह आंकड़ों की बाजीगरी से भरे हुए आते हैं या उनमें कुछ नयापन होता है। उम्मीद करते हैं कि सरकार आंकड़ों की बाजीगरी से बाहर निकलकर यह देखे कि हकीकत में बाहर का ताममान 42 डिग्री को पार कर रहा है और चारों और अशंकाओं का मरूस्थल नजर आ रहा है।

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