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फैक्ट्री के केमिकल युक्त पानी से कई एकड जमीन हो रही बंजर

   -फैक्ट्री के केमिकल युक्त पानी से हजारो एकड फसल बर्बाद 

 -नदी में छोडा जा रहा है केमिकल युक्त पानी
 – नदी का पानी भी हुआ दुषित, प्रशासन ने नहीं की कार्रवाही

 

मध्यप्रदेश ।  किसान हितेशी कांग्रेस सरकार एक फैक्ट्री पर कार्रवाही नहीं कर रही है,इस फैक्ट्री से लगातार कैमिकल युक्त वेस्ट पानी नदी में छोडा जा रहा है, इस नदी से लगे हजारों किसानों के खेत में खडी फसल बर्बाद हो गई। इसके अलावा नदी का पानी भी जहर हो गया है। फैक्ट्री के आसपास के गांव में रहने वाले ग्रामीण परेशान है,किसानों में प्रशासन को शिकायत भी की लेकिन फैक्टी से कैमिकल युक्त पानी नदी में छोडना बंद नहीं हुआ,यही हाल रहा तो नदी का जीवन समाप्त हो जाएगा वहीं किसानों की कई एकड कृषि भूमि बंजर हो जाएगी।

जानकारी के अनुसार प्रदेश की राजधानी के लगे जिले सीहोर में ग्राम पिपलियामीरा में स्थित जयश्री गायत्री फूड कंपनी पनीर फैक्ट्री से हर रोज कैमिकल युक्त पानी सीवन नदी,खेतों में छोड दिया जाता है। इस कैमिकल युक्त पानी ने दर्जनों ग्रामीण के जीवन मे जहर घोल दिया है। यहां तक कि जनवरों को पानी पिलने तक का संकट हा रहा है। परेशान ग्रामीणों ने फैक्ट्री के खिलाफ अब अक्रोश बढ रहा हैं, किसान अपने तारीके से फैक्ट्री से निकलने वाले कैमिकल युक्त पानी को बंद कराने लामबंद हो रहे है। सीवन नदी पीपलियामीरा,चंदेरी,तकीपुर,शेरपुर और सीहोर के लोगों की प्यास बुझाती है। नदी में दूषित पानी प्रवाहित करने से सैकड़ों किसानों की खेती प्रभावित हो रही है तो वहीं दूसरी और ग्रामीणों के लिए पेयजल संकट भी खडा हो रहा है।
पीपलियामीरा के किसान घनश्याम मेवाडा का कहना है कि पनीर फैक्टरी के समीप उनकी पांच एकड जमीन है। ट्रीटमेंट प्लांट होने के बावजूद भी फैक्ट्ररी का गंदा पानी उसके खेत में छोड दिया जाता है जिससे उसकी फसल बर्बाद हो गई, बुधवार रात को भी केमिकलयुक्त पानी उसके खेत में छोडा गया। किसान का कहना है कि फैक्ट्ररी संचालक उसकी जमीन खरीदना चाहता है और उस पर लगातार दबाव बना रहा है। किसी भी फैक्ट्री को पर्यावरण नियमो का पालन करना ही होता है, जिस तरह से गायत्री फूड कंपनी अपनी पनीर फैक्ट्री से कैमिकल युक्त पानी सीवन नदी और किसानों के खेतों में छोड रही इससे पर्यावरण और मानव जीवन को बडा नुकसान हो रहा है।

-पीने के पानी के लिए दूसरों पर निर्भर
गांव के किसान खुशीलाल मेवाडा ने बताया कि सीवन नदी के समीप उनकी 5 एकड जमीन है। फैक्ट्ररी के गंदे पानी से उनका कुआं और टयूबेल का पानी अब पीने योग्य नहीं बचा। वह दूसरे किसान के खेत से पीने का पानी लाते हैं। वह लगातार तीन साल से इस संबंध में शिकायत कर रहे हैं लेकिन कार्रवाई नहीं होती। गांव के किसान मानसिंह कुशवाह ने बताया कि बीते साल उसने खेत में एक एकड में सब्जी लगाई थी लेकिन फैक्ट्ररी के गंदे पानी के कारण सब बर्बाद हो गई।


—शिकायत पर नहीं हुई कार्रवाई
ग्राम पीपलिया मीरा की सरपंच प्रीति भारती का कहना है कि फैक्ट्ररी से निकलने वाले रसायनिक पानी को लेकर वह विगत तीन वर्षों से शिकायत करती आ रही हैं। लेकिन प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं हुई ट्रीटमेंट प्लांट होने के बावजूद भी हानिकारक पानी नदी और किसानों के खेतों में छोडा जा रहा है। जिससे खेती और पर्यावरण को संकट है।

-फैक्ट्री की जमीन पर छोडते है पानी
जयश्री गायत्री फूड कंपनी के जीएम सुनील त्रिपाठी का कहना है कि ट्रीटमेंट प्लांट लगाया है जिसमें फैक्ट्री के पानी को शोधन कर निकाला जाता है और यह पानी फैक्ट्ररी की जमीन पर छोडा जाता है।

-फैक्ट्री संचालक को देने इन सवालों के जबाव

फैक्ट्री में अगर ट्रीटमेंट प्लांट लगा है तो इतनी मात्रा में पानी बाहर छोडने की जरूअत क्या है? क्योंकि ट्रीटमेंट के बाद पानी का उपयोग फैक्ट्री के भीतर ही उपयोग होना चाहिए।

अगर फैक्ट्री से सीवन नदी में कई गेलन पानी नदी में नहीं छोडा जा रहा है तो नदी में कैमिकल युक्त पानी कहां से आया? और नदी के पानी का रंग लाल क्यों ​हो गया? कई मिलोमीटर दूर किसानों के खेतों तक कैमिकल युक्त पानी कैसे पुहंच रहा है?

नियम के अनुसार फै​क्ट्री से निकलने वाले पानी का सही तारीके से ट्रीट्रमेंट करने के बाद पानी का उपयोग फैक्ट्री के भीतर होने के बाद भी अगर पानी बचता है तो उसे फैक्ट्री नदी या किसानों के खेतों में नहीं छोड सकती है। इस पानी को गंदे नाले या सोखते गड्ढों में छोडा जा सकता है।

 

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