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उस दिन ऐसा हुआ कि शिवराज को छोड़कर सभी दौड़ पडे मुंबई की ओर…

27 नवंबर 2008 ,अल- सुबह को मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव का मतदान कवर करने चैनल के कई संवाददाता शिवराज के गांव पहुँचकर इंतज़ार करते रहे अपने ओबी वैन्स का , पर जैत के लिए निकली ये सारे ओबी दौड़ पड़ी थीं मुंबई की ओर….

 

   ( होमेन्द्र देशमुख ) 

 

दृश्य एक :26/11/2008
शाम , टीवी चैनल्स के ओबी वैन भोपाल में एमपी नगर के एक होटल के बाहर खड़ी थी । इंजीनियर और ड्राइवर बड़े टास्क पर जाने से अपनी सारी तैयारी पूरी कर रहे थे । वैन और जनरेटर के तेल भरवाकर छतरी के नट बोल्ट और सिग्नल चेक किये जा रहे थे । केवल यही नही , उस होटलके अलावा चंद फ़ासलों पर अलग अलग होटलों के बाहर पार्किंग में खड़ी, मुम्बई , दिल्ली, अहमदाबाद से आये कई दूसरे ओबी वैन के क्रू या तो अपने सैटेलाइट से सिग्नल चेक कर रहे थे या कोई इन गाड़ियों के सीट पर पसरकर और होटल के कमरों में अपने लंबे सफर की थकान उतार रहे थे ।

दृश्य दो : 26/11/2008

यू पी ,गुजरात, मुम्बई ,दिल्ली से भोपाल आये अंग्रेजी- हिंदी राष्ट्रीय टी वी चैनलों के बड़े बड़े एंकर और इराक़ ,सीरिया, करगिल के युद्धों के सजीव और जांबाज रिपोर्टिंग कर चुके वरिष्ठ संवाददाता अपने मप्र के स्थानीय ब्यूरो के दफ्तरों में दूसरे दिन होने वाले चुनाव के महा-कवरेज पर निकलने से पहले अपने-अपने तैनाती स्थल , समय को लेकर हेड ऑफिस और अपने शूटर कैमरेबाज़ों से संवाद कर रहे थे ।

दृश्य तीन : 26/11/2008

शाम वही लेकिन अंधेरा यहाँ भी घिर चुका था ,बल्कि रात गहरा चुकी थी । मुंबई के वीवीआईपी और सबसे संवेदनशील क्षेत्र कोलाबा के समुद्र तट पर मछुवारे की मोटर बोट से पीठ पर किसी खास मिशन के पूर्ण तैयारी की किट पिट्ठू बैग में लादे 10 जवान भी अपने खास और बड़े मिशन की तैयारी में उतर रहे थे । तट पर एक स्थानीय ने पूछा आप लोग कौन ..? सवाल खत्म भी नही हुआ कि दो जवानों ने उसे, अपने काम से काम रखने की हिदायत-नुमा जवाब देकर ताबड़तोड़ आगे बढ़ गए ।

ड्यूटी की तैनाती स्थल और दूरी के हिसाब से किसी को आधी रात और किसी को अल सुबह उस लक्ष्य की दिशा में कूच करने का निश्चय कर लिया गया । सभी दृश्यों के समय लगभग वही ,दिन वही , ये पात्र जिस शहर में हैं ,वहां से लगभग अधिकतर वो खुद अनजान भी थे ।

मिशन , उद्देश्य , स्थान , साजो- सामान और तैयारी इन सारे दृश्यों के पात्रों के अलग अलग हो सकते हैं , लेकिन सबका लक्ष्य एक ही था –

“टीवी चैनलों के अगली सुबह की पहली बुलेटिन के हेडलाइन  पर छा जाना ।”

आधी रात एक-एक कर के सभी ओबी भोपाल के होटलों के पार्किंग से जैसे दबे पांव निकलती गईं । वैसे ही जैसे स्नाइपर, युद्ध भूमि में अपने कदमों आहट , जमीं के घास को भी न होने दें ।
लगा शायद ज्यादातर ओबी इसलिए चुपके से निकल रहे होंगे कि किसी को मुख्यमंत्री शिवराज चौहान के गांव ,किसी को और किसी मतदान केंद्र , पार्टी ऑफिस में पहले पहुँचकर सही जगह पर वैन पार्क कर लिया जाय ।

दृश्य चार : गुरुवार , 27 नवंबर 2008 

नर्मदा नदी के शांत और चौड़े पाट की उतरती धारा की ओर से सूरज भी इस सदानीरा प्रवाह के दर्शन करने को आतुर है । सर्द रात की अलसुबह पौं फटने से पहले नर्मदा की आँचल में बेफिक्र दुबके जैत गांव के घाट और घुमावदार किनारे पर कुछ साए चहलकदमी कर रहे हैं । ये साए नई और गुनगुनी सुबह के इंतज़ार में , समय से पहले यहां पहुँच चुके वही मेहमान पत्रकार और भारत के चौथे स्तंभ के प्रतिनिधि के हैं जो खूबसूरत लोकतंत्र के सबसे बड़े त्योहारों में से एक, मप्र विधानसभा चुनाव 2008 के प्रमुख उत्सव और यज्ञ यानि मतदान में अपनी आहुति देने पहुंचे थे । पिछली रात की योजना के अनुसार कुछ सफेद और लाल रंग से रंगे ओबी वैन यहीं पहुँचे थे ,कुछ और के पहुचने का इंतज़ार भी हो रहा था ।
सुबह हो चुकी थी ,गांव का बेटा और इस उत्सव- यज्ञ का एक प्रमुख जजमान और प्रदेश के मुख्यमंत्री (निवर्तमान) शिवराज सिंह चौहान यहीं अपना वोट करने वाले थे । न्यूज़ चैनलों ,मीडिया संस्थानों के पिछले रात की मीटिंग और सारी तैयारी इस बहुप्रतीक्षित खास दिन और मौके को जल्द से जल्द और बेहतर कवर करने की थी । शिवराज चौहान के घर तथा मतदान केंद्र वाले स्कूल के सामने धूल भरी गौठान में कुछ एक-दो लाल सफेद और तेज खबरों के ये वैन पहुंच कर अपनी छतरियां तान चुके थे वहीं कुछ और नामी चैनेलों के वैन अभी भी कहीं भटके हुए थे । उनके प्रतिनिधि लगातार उनसे संपर्क करने की असफल कोशिशों में लगे , हैरान-परेशान थे । देर रात की मीटिंग में सुबह सबसे पहले , सबसे तेज़ और पल पल की खबर भेजने की हिदायत देने वाले चैनल के मुख्यालय और स्टूडियो के अधिकारी सुबह से न जाने फोन को कहाँ व्यस्त कर चुके थे । कभी कभार फोन उठा भी ले तो सख्त आदेश मे तुरन्त आदेश मिलता था फोन रखिये …!
सुबह के 6.30 बज चुके थे ।अब तक जैत गांव के उस गौठान में खड़े हो चुके तीन ओबी में से एक ,लाल रंग का वैन चुपके से निकल कर धूल उड़ाते गायब हो गया ।
सबका माथा ठनका , मुम्बई से आये उसी ओबी के चालक को फोन करने पर पता चला कि उसे सब काम छोड़कर तुरंत मुंबई पहुचने कहा गया है । क्योंकि पिछली रात वहां कोई आतंकी अटैक हो गया है । उससे ज्यादा मुझे कुछ नही मालूम ।

चुनावी हेडलाइन देने कुछ विदेशी मीडिया के प्रतिनिधि और देश भर से मप्र के अलग-अलग हिस्से में तैयारी से पहुँचे बड़े बड़े रिपोर्टर के चैनेलों को उनके फ़ोन उठाने की भी फुर्सत नही थी । मध्यप्रदेश के विधानसभा 2008 चुनाव में मतदान की पल पल की खबर देने ,कोई भोपाल के पार्टी कार्यालयों में तैनात थे ,कोई किसी वीवीआईपी के मतदान केंद्र में थे ,उसमे से कई ,मुख्यमंत्री के इसी गांव ‘जैत’ में भी थे । वे सब जहां थे जैसे खड़े थे वहीं से अपने अपने घरों पर, कंबल के नीचे दुबके- सोते परिवार वालों और मित्रों को फोन पर जगा-जगा कर टीवी का हेडलाइन चेक करवा रहे थे ।
टीवी न्यूज चैनेलों पर बस एक ही खबर थी । क्या बुलेटिन क्या और हेडलाइन ..! मुंबई के फिल्मी सड़कों और इमारतों के बाहर लाइव मुड़भेड़ , गोलीबारी, सजीव वीडियो –

” मुंबई में आतंकी हमला..”

अब तो जैत गांव हो या बाकी मध्य प्रदेश । चुनाव की खबर क्या खबरनवीसों को कौन पूछता !

बहुत देर से पता चला कि देर रात से सुबह तक एक- एक कर,भोपाल के होटलों में खड़ी सारी ओबी वैन को मुंबई के लिए रवाना कर दिया गया था । उनके ड्राइवर और इंजीनियरों को किसी को कुछ बताने के बजाय चुपके से निकल जाने कहा गया था । प्रदेश भर के अपने तैनाती के मतदान केंद्रों से सब संवाददाता बारी-बारी उल्टे पांव राजधानी की ओर लौटने लगे ।
‘तीन दृश्यों ‘ का वर्णन मैंने प्रारंभ में किया था जिसमे प्रथम दृश्य राजधानी भोपाल के एम पी नगर के होटलों और दूसरा दृश्य विभिन्न राज्य और राष्ट्रीय हिंदी-अंग्रेजी न्यूज़ चैनलों के मप्र के स्थानीय कार्यालयों का था ।
तीसरा दृश्य उसी मुंबई और उन्हीं आतंकियों का था ,जो अब सुबह तक मुंबई के ताज होटल , लियोपेल्ड कैफे, शिवाजी टर्मिनस, ओबेरॉय ट्राइडेंट ,नरीमन हाउस जैसे विश्व-मशहूर जगहों पर अपने आतंक का कब्जा जमा चुके थे और कब्जा जमा चुके थे देश विदेश और प्रदेश के हर न्यूज़ चैनल के स्क्रीन पर ! हेडलाइन क्या पूरे टीवी चैनलों के स्क्रीन के जरिये देश की जनता में दहशत फैलाने का उनका उद्देश्य और लक्ष्य सचमुच पूरा हो रहा था । यह सिलसिला आगे सप्ताह भर तक लगातार जारी रहा ।

 

26 नवंबर 2019 को इस कुख्यात घटना की 11 वीं बरसी है । इस साल मध्यप्रदेश चुनाव तो नही लेकिन संयोगवश उसी मुंबई में महारास्ट्र के विधानसभा चुनाव के महीने भर बाद भी ,सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठे यही गहमागहमी बरकरार है । जहां पिछले मुख्यमंत्री शपथ ले चुके हैं तो तीन अन्य दल मुंबई के हयात होटल से 162 विधायकों का गठजोड़ शो कर शक्ति प्रदर्शन का दावा कर रहे हैं । इनका राजनैतिक शो ‘तमाशा’ देश-विदेश और मुम्बई की जनता टीवी ,अख़बार पर आज देख रही है ,। यह शो उसी मुंबई के किसी समाधि ,मेमोरियल , पीड़ितों के ज़ख्म और 26/11 के शहीद भी देख रहे होंगे । वो यह भी देख रहे होंगे कि कोई , सत्ता के दौड़ में सफलता का जश्न मनाकर ,मिठाई बाटेंगे – कोई विफलता के आंसू बहाएंगे । पर 26/11 के शहीदों और जांबाज़ नागरिक और सैनिकों को ये भूल जाएं ,इसमें आश्चर्य भी नही ।

“शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशा होगा..।”

क्या ये लाइनें आज 26/11 की 11 वीं बरसी पर व्यर्थ जाएंगी ,क्या ये पंक्तियां सत्ता बनाम सेवा की लड़ाई और जश्न के नारों में कहीं खो जाएंगी…।

 

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