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गणतंत्र दिवस विशेष : गणतंत्र शब्द का उद्देश्य क्या है ?

 

 

[mkd_highlight background_color=”” color=”red”]मनीषा शाह[/mkd_highlight]

 

आज भारत अपना 72 वां गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को मना रहा है । जैसा कि हम सब जानते हैं कि भारत विश्व का सबसे बड़ा गणतंत्र है। जनसंख्या के अनुसार जिसकी आधारशिला 26 जनवरी 1950 को रखी गई थी। इस दिन भारत का संविधान प्रस्तुत किया गया था जो कि हमारे राजनेता क्रांतिकारी बुद्धिजीवी की मेहनत का परिणाम है,पर क्या आप यह बात जानते हैं भारत एक विशेष गणतंत्र राज्य हैं ।ऐसी क्या चीज है जो उसे विशेष बनाती है। इसे विशेष बनाता है उसका रूपांत्री करण और परिवर्तन अपनाने की शैली । भारत ने अपने अंदर कई परिवर्तनो को समाविष्ट किया है । प्राचीन काल में यह राजतंत्र था अर्थात राजा का शासन जिसकी सबसे बेहतरीन मिसाल माना जाता है रामराज्य , जिसमें जहां श्री राम का राज्य था उनका जनता के प्रति पूर्ण उत्तरदायित्व था ।जिसका परिणाम यह हुआ उन्हें अपनी पत्नी सीता का त्याग भी करना पड़ा अर्थात उन्हें अपने निजी जीवन को ताक पर रखते हुए अपना जीवन प्रजा को समर्पित करना पड़ा । उसके बाद भारत में सबसे बड़ा परिवर्तन देखा गया हस्तिनापुर द्वारा जहां राजतंत्र तो तब भी था परंतु जनता के प्रति उत्तरदायित्व का भाव समाप्त सा हो गया था । उस समय राजा धृतराष्ट्र का राज्य था जिन्होंने यह बताया यदि राज्य करना है तो नेत्रों से ही नहीं बल्कि हर तरह से दृष्टिहीन होना पड़ता है ।आगे चले तो इसी प्रणाली को आगे बढ़ाया गया मुगलों और अंग्रेजों द्वारा ,पर क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि अब तक हमें एक हमें वास्तविक राज्य संचालन का तरीका नहीं मिल पाया था। जब तक हमने गणतंत्र राज्य के सपने की आधारशिला को नहीं रखा था ।

गणतंत्र शब्द का उद्देश्य क्या है ? शासन तो किया जाए परंतु एक शासक के रूप में नहीं अपितु जनता के सेवक बनके ।जहां एक संतुलन स्थापित किया जाए राजा के निजी और राजनीतिक जीवन के बीच में । राजनीति जनता के लिए जनता के द्वारा जनता को समर्पित करते हुए ही की जाए।
जैसा कि हम जानते हैं हमारा गणतंत्र कई संस्कृतियों का मिश्रण है। जिसमें स्वयं की तो छाप है ही पर दूसरी संस्कृतियों की भी जैसे अमेरिका आयरलैंड यूनाइटेड किंगडम फ्रांस की भी खुशबू है । उदाहरण स्वरूप राज्य संचालन का तरीका अधिकार का उपयोग आदि शामिल है । पर क्या इतना करने मात्र से हमारा सपनों का भारत हकीकत का भारत बन जाएगा। नहीं बिल्कुल नहीं ।अभी हम कुछ कदम चले हैं अभी तो रहा काफी लंबी है ।जैसा कि सब जानते हैं भारत कभी सोने की चिड़िया कहलाता था जिसका आधार स्तंभ महर्षि चाणक्य ने रखा था। पर भारत से यह तमगा छीनने में अधिक समय नहीं लगा पर ऐसा हुआ क्यों? क्या यह जानने की कोशिश की गई। आर्थिक संपन्नता कुछ समय तक तो हमें सर्वोत्तम बना कर रख सकती है पर उसे निरंतर बनाए रखने के लिए जिन चीजों की आवश्यकता होती है वह है आंतरिक स्वीकार्यता की भावना बौद्धिक प्रगति इंसानियत । हमने बाहरी संस्कृति को चाहे धार्मिक रूप में या प्रौद्योगिकी रूप में भले ही स्वीकार कर लिया था ।परंतु आंतरिक रुप में आज तक नहीं अपनाया ।हमने अपने धर्म के अलावा भले ही दूसरे धर्मों को मानना प्रारंभ किया पर उसकी असल भावना को आज तक नहीं समझ पाए ।जो बताता है धर्म मनुष्य के लिए। है ना कि मनुष्य धर्म के लिए धार्मिक स्वीकार्यता को परे भी रख दिया जाए तो प्रौद्योगिक स्वीकार्यता की बात को आगे लाया जाए तो चाहे ही हमने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपना लिया हो , टिक-टोक यूट्यूब जैसे प्लेटफार्म को अपना लिया हो या हमने दुनिया को चाहे एक सत्याइ नडेला, एक सुंदर पिचाई ,एक कमला हैरिस दी हो पर क्या मात्र इतना काफी है। सबसे बड़ा गणतंत्र बनने के लिए। यह गणतंत्र कैसे हुआ ।

यह तो एक तंत्र हुआ ।139 करोड़ की जनसंख्या मैं कुछ हजार कैसे एक बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं ।हमें करोड़ों की फौज की जरूरत है हकीकत के गणतंत्र को स्थापित करने के लिए ।जिसमें ना सिर्फ आर्थिक संपदा लाने की ताकत हो बल्कि आय समानता लैंगिक समानता धार्मिक सहिष्णुता इमोशनल इंटेलिजेंस बौद्धिक स्थिरता का अद्भुत मिश्रण हो। हम तभी विश्व पटल पर खुद को असल में गणतंत्र रेखांकित कर सकते हैं। हम हमेशा किसी एक पर निर्भर नहीं हो सकते ।किसी राज्य का उत्तरदायित्व सिर्फ उसके राजा का नहीं बल्कि जनता का भी होता है ।उसे समय आने पर सवाल करना भी आना चाहिए और सवालों के जवाब ना मिलने पर खड़ा होना भी आना चाहिए ।क्योंकि हम अपने लिए जो चुनाव करते हैं हमें परिणाम भी वैसे ही दिखाई देते हैं ।जैसे जैसी प्रजा वैसा राजा जैसा राजा परिणाम स्वरूप वैसा राज्य ।तो आज के दिन हमें अपने संविधान से शपथ लेनी चाहिए कि भले ही आज इंडिया गेट में हर रंग को समेटे हुए कई झांकियां निकाली जाएंगी परंतु हम अपने अंतः करण में हर रंग की झांकी को स्थापित कर सकें ।ताकि यह दिवस सही मायने में गणतंत्र दिवस के रुप में मनाया जाए।

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